संदेश

हर एक चीज में एक खूबसूरती, एक अच्छाई होती है, लेकिन हर कोई उसे नहीं देख पाता

कमी निकालना , निंदा करना , बुराई करना आसान है, लेकिन उन कमियों को दूर करना अत्यंत कठिन होता है।



बहुत समय पहले की बात है।एक बार एक गुरु जी गंगा किनारे स्थित किसी गाँव में अपने शिष्यों के साथ स्नान कर रहे थे।तभी एक राहगीर आया और उनसे पूछा, “महाराज, इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं, दरअसल मैं अपने मौजूदा निवास स्थान से कहीं और जाना चाहता हूँ?

गुरु जी बोले, “जहाँ तुम अभी रहते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं?
मत पूछिए महाराज, वहां तो एक से एक कपटी, दुष्ट और बुरे लोग बसे हुए हैं.”, राहगीर बोला। गुरु जी बोले, “इस गाँव में भी बिलकुल उसी तरह के लोग रहते हैं…कपटी, दुष्ट, बुरे…”

और इतना सुनकर राहगीर आगे बढ़ गया।कुछ समय बाद एक दूसरा राहगीर वहां से गुजरा।उसने भी गुरु जी से वही प्रश्न पूछा, “मुझे किसी नयी जगह जाना है, क्या आप बता सकते हैं कि इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं ?

जहाँ तुम अभी निवास करते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं ?”, गुरु जी ने इस राहगीर से भी वही प्रश्न पूछा। “जी वहां तो बड़े सभ्य, सुलझे और अच्छे लोग रहते हैं.”, राहगीर बोला।

तुम्हे बिलकुल उसी प्रकार के लोग यहाँ भी मिलेंगे……

A friend in need is a friend in deed

~~ 1 ~~
Once a lion lay fast asleep in the Ranthambore forest of Rajasthan. Some mice were playing hide and seek near him. One mouse got trapped under the lion's paw. The lion woke up, laughed loudly and let the mouse go!  After some days the mouse heard the lion's roar. He saw that the lion lay in great pain as he was tied with many rupees. The mouse used his sharp teeth and cut the rope.Thus it escaped. 
Indeed, a friend in need is a friend in deed.
"You are a true friend," said the lion. 
There after, the mouse and the lion became friends. They lived happily in the forest afterwards. 

From Aesop's Fables


~~ 2 ~~

Once there were two friend lived near the forest village. They were fast friends. They promise to each other if any difficult time will come they will help each other and never leave alone. One day they were going city to bring some house use products.  When they were passing through forest they saw a bear coming toward him. One friend knows how to clim…

सुभाषित

वाणी रसवती  यस्य यस्य श्रमवती क्रिया ।
लक्ष्मीर्दानवती यस्य सफलं तस्य जीवितम् ॥भावार्थ- जिसकी वाणी रसपूर्ण हो, कर्म-क्रिया श्रमवान हो, और लक्ष्मी दानवती हो उसका जीवन निश्चित ही सफल होता है।शान्तितुल्यं तपो नास्ति
           न संतोषात्परं सुखम्।
न तृष्णया: परो व्याधिर्न
           च धर्मो दया परा:।।भावार्थ- शान्ति के समान कोई तप नही है, संतोष से श्रेष्ठ कोई सुख नही, तृष्णा से बढकर कोई रोग नही और दया से बढकर कोई धर्म नहीं।


Beautiful interpretation of Karma and Bhagya

✍एक चाट वाला था। जब भी चाट खाने जाओ ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है जल्दी चाट लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती।एक दिन अचानक कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई।तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी देख ही लेते हैं। मैंने एक सवाल उछाल दिया।मेरा सवाल था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से?और उसके जवाब से मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए।कहने लगा,आपका किसी बैंक में लॉकर तो होगा?उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लॉकर की दो चाभियाँ होती हैं।एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास।आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य।जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला नहीं खुल सकता।आप कर्मयोगी पुरुष हैं और मैनेजर भगवान।अाप को अपनी चाभी भी लगाते रहना चाहिये।पता नहीं ऊपर वाला कब अपनी चाभी लगा दे। कहीं ऐसा न हो कि भगवान अपनी भाग्यवाली चाभी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाभी न लगा पायें और ताला खुलने से रह जाये ।
This is a beautiful interpretation of Karm…

मित्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐ

तप्त ह्दय सरस स्नेह से
जो सहला दे मित्र वही है
रूखे मन को सरोबार कर
जो नहला दे मित्र वही है
प्रिय वियोग संतप्त चित्त को
जो बहला दे मित्र वही है
अश्रु बूंद की एक झलक से
जो दहला दे मित्र वही है
मित्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐ

Golden Rules of Life : ACCEPTANCE

चित्र
✍*ACCEPT*
      Accept others for
      who they are and
      for the choices they
      have made even if
      you have difficulty
      understanding their
      beliefs, motives
      or actions.

जहाँ प्रेम है, वहाँ लक्ष्मी का वास है

एक बनिए  से लक्ष्मी जी रूठ गई। जाते वक्त बोली मैं जा रही हूँ और मेरी जगह टोटा (नुकसान ) आ रहा है। तैयार हो जाओ। लेकिन मैं तुम्हे अंतिम भेंट जरूर देना चाहती हूँ। मांगो जो भी इच्छा हो।
बनिया बहुत समझदार था। उसने 🙏 विनती कि टोटा आए तो आने दो। लेकिन उससे कहना कि मेरे परिवार  में आपसी प्रेम बना रहे। बस मेरी यही इच्छा  है।
लक्ष्मी जी ने तथास्तु कहा।कुछ दिन के बाद :-
बनिए की सबसे छोटी बहू खिचड़ी बना रही थी। उसने नमक आदि डाला और अन्य  काम करने लगी। तब दूसरे लड़के की  बहू आई और उसने भी बिना चखे नमक डाला और चली गई। इसी प्रकार तीसरी, चौथी बहुएं आईं और नमक डालकर चली गई। उनकी सास ने भी ऐसा किया।शाम को सबसे पहले बनिया आया। पहला निवाला मुँह में लिया और देखा कि बहुत ज्यादा नमक है। लेकिन वह समझ गया  कि टोटा (हानि)  आ चुका है, चुपचाप खिचड़ी खाई और चला गया। इसके बाद  बङे बेटे का नम्बर आया।पहला निवाला  मुँह में लिया, पूछा, पिता जी ने खाना खा लिया? क्या कहा उन्होंने ?सभी ने उत्तर दिया:- "हाँ खा लिया,कुछ नही बोले।"अब लड़के ने सोचा जब पिता जी ही कुछ  नहीं बोले तो मैं भी चुपचाप खा लेता हूँ। इस प्रकार घ…