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अगर कोई समस्या हो ही न, तो फिर समाधान कैसा?

अंगदेश के महामंत्री युतिसेन की मृत्यु हो गई। उस राज्य में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति को ही मंत्री बनाने का नियम था। इसके लिए पूरे राज्य में परीक्षाएं हुईं और तीन सबसे ज्यादा बुद्धिमान युवक चुने गए। उन्हें राजधानी बुलाया गया। तीनों युवक मुख्य परीक्षा से एक दिन पहले राजधानी पहुंचे।
उन्हें एक कक्ष में ठहराया गया। कक्ष में प्रवेश करते ही एक युवक सीधा अपने बिस्तर तक गया और सो गया। शेष दोनों युवकों ने समझा कि शायद उसने परीक्षा देने का ख्याल छोड़ दिया है। वे दोनों रात भर तैयारी करते रहे।
अगली सुबह तीनों एक साथ राजमहल पहुंचे। वहां उन्हें परीक्षा की शर्त बताई गई। असल में, परीक्षा के लिए एक कक्ष बनाया गया था। उस कक्ष में एक ताला लगा था। उस ताले की कोई चाबी नहीं थी। उस पर गणित के कुछ अंक लिखे हुए थे।
शर्त यह थी कि जो युवक उन अंकों को हल कर लेगा, वह ताला खोल लेगा। उन तीनों युवकों को उस कक्ष में बंद कर दिया गया, और कहा गया कि जो सबसे पहले दरवाजा खोलकर बाहर आएगा, वही महामंत्री बनेगा।
तीनों भीतर गए। जो युवक रात भर सोया रहा था, वह फिर आंखें बंद करके एक कोने में बैठ गया। बाकी दोनों ने अपने …
हाल की पोस्ट

जहाँ प्रेम है, वहाँ लक्ष्मी का वास है

एक बनिए  से लक्ष्मी जी रूठ गई। जाते वक्त बोली मैं जा रही हूँ और मेरी जगह टोटा (नुकसान ) आ रहा है। तैयार हो जाओ। लेकिन मैं तुम्हे अंतिम भेंट जरूर देना चाहती हूँ। मांगो जो भी इच्छा हो।
बनिया बहुत समझदार था। उसने 🙏 विनती कि टोटा आए तो आने दो। लेकिन उससे कहना कि मेरे परिवार  में आपसी प्रेम बना रहे। बस मेरी यही इच्छा  है।
लक्ष्मी जी ने तथास्तु कहा।कुछ दिन के बाद :-
बनिए की सबसे छोटी बहू खिचड़ी बना रही थी। उसने नमक आदि डाला और अन्य  काम करने लगी। तब दूसरे लड़के की  बहू आई और उसने भी बिना चखे नमक डाला और चली गई। इसी प्रकार तीसरी, चौथी बहुएं आईं और नमक डालकर चली गई। उनकी सास ने भी ऐसा किया।शाम को सबसे पहले बनिया आया। पहला निवाला मुँह में लिया और देखा कि बहुत ज्यादा नमक है। लेकिन वह समझ गया  कि टोटा (हानि)  आ चुका है, चुपचाप खिचड़ी खाई और चला गया। इसके बाद  बङे बेटे का नम्बर आया।पहला निवाला  मुँह में लिया, पूछा, पिता जी ने खाना खा लिया? क्या कहा उन्होंने ?सभी ने उत्तर दिया:- "हाँ खा लिया,कुछ नही बोले।"अब लड़के ने सोचा जब पिता जी ही कुछ  नहीं बोले तो मैं भी चुपचाप खा लेता हूँ। इस प्रकार घ…

छोटे और बड़े

🍃🍂🍃🍂🍁🎭🍁🍂🍃
जो लोग आपके पद प्रतिष्ठा
   और पैसे से जुड़े हे,
       वो लोग आपके 'साथ' खड़े रहेंगे,
         परन्तु जो लोग आपकी वाणी,
        विचार और व्यवहार से जुड़े हैं,
       वो लोग आपके 'लिये' खड़े रहेंगे !!
          इतने छोटे बनिए की हर कोई
      आप के साथ बैठ सके
और इतने बड़े बनिए की
        आप खड़े हो तो कोई बैठा न रहे !!       💐💐🍃🍂🍃🍂🍁🎭🍁🍂🍃

26 LIFE PRINCIPLES

🌀A
        ✍*ACCEPT*
      Accept others for
      who they are and
      for the choices they
      have made even if
      you have difficulty
      understanding their
      beliefs, motives
      or actions.🌀B
        ✍*BREAK AWAY*
      Break away from
      everything that
      stands in the way
      of what you hope
      to accomplish
      with your life.🌀C
        ✍🏽
      *CREATE*
      Create a family
      of friends whom
      you can share your
      hopes, dreams,
      sorrows, and
      happiness together.🌀D
        ✍ *DECIDE*
      Decide that you’ll be
      successful *&* happy
      come what may, and
      good things will find
      you. The roadblocks
      are only minor
      obstacles along
      the way.🌀E
        ✍*EXPLORE*
      Explore & experiment.
      The world has much
      to offer, and you
      have much to give.
      And every time you
      try something new,
      you’ll learn more
      about …

Some beautiful answers and way of thinking of .....

*What Is Poison ? ? ?*
He Replied With A Beautiful Answer - *AnyThing Which Is More Than Our Necessity Is Poison.* It May Be Power, Wealth, Hunger, Ego, Greed, Laziness, Love, Ambition, Hate Or AnyThing.*What Is Fear ? ? ?*
Answer: *Non Acceptance Of Uncertainty.*
If We Accept That Uncertainty, It Becomes Adventure.*What Is Envy ?*
Answer: *Non Acceptance Of Good In Others,*.. If We Accept That Good, It Becomes Inspiration.*What Is Anger ? ? ?*
Answer: *Non Acceptance Of Things Which Are Beyond Our Control.*
If We Accept, It Becomes Tolerance.*What Is Hatred ? ? ?*
Answer: *Non Acceptance Of Person As He Is.* If We *Accept any Person Unconditionally, It Becomes Love.*

ईश्वरलाभ

एक गांव में एक लकडहारा रहता था. वह रोज जंगल जाकर लकडी काटता और उसे बाजार में बेच देता. किन्तु कुछ समय से उसकी आमदनी घटती चली जा रही थी.      उसकी मुलाकात एक संन्यासी से हुई. लकडहारे ने संन्यासी से विनती की- महाराज आमदनी घटने से परिवार का गुजारा मुश्किल हो गया है. दरिद्रता दूर करने का उपाय बताएं.        उस सन्यासी ने लकडहारे को कहा- जा आगे जा. सन्यासी का आदेश मानकर लकड़हारा आगे बढ़ता गया.      चलते-चलते उसे कुछ देर बाद उसे चंदन का वन मिला. वहां की चंदन की लकडी बेच-बेच कर लकड़हारा अच्छा-खासा धनी हो गया.       दिन सुख से कटने लगे तो एक दिन लकडहारे के मन में विचार आया कि संन्यासी ने तो मुझे आगे जा कहा था.
मैं फिर मात्र चंदन के वन से ही संतोष क्यों कर रहा हूं. यहीं फंसे रहने से क्या लाभ. मुझे तो और आगे जाना चाहिए. यह विचार करते-करते वह और आगे निकलता गया. आगे उसे एक सोने की खदान दिखाई दी. उसकी आंखें फटी रह गईं.       सोना पाकर लकडहारा पहले से कई गुना अधिक धनवान हो गया. कोई कमी न रही उसे धन-दौलत की लेकिन उसमें और पाने की इच्छा पैदा हुई. कुछ दिनों तक सोना बेचने के बाद लकडहारा और आगे चल पडा.…

A Beautiful story!!

A man often bought oranges from an old lady.
After they were weighed, paid for and put in his bag, he would always pick one from his bag, peel it, put a segment in his mouth, complain it's sour and pass on the orange to the seller.
The old lady would put one segment in her mouth and retort, "why, it's sweet," but by then he was gone with his bag.
His wife, always with him, asked, "the oranges are always sweet, then why this drama every time?"
He smiled, "the old mother sells sweet oranges but never eats them herself. This way I get her to eat one, without losing her money. That's all."
The vegetable seller next to the old lady, saw this everyday.
She chided, "every time this man fusses over your oranges, and I see that you always weigh a few extra for him. Why?"
The old lady smiled, "I know he does this to feed me an orange, only, he thinks I don't understand. I never weigh extra. His love tilts the scale slightly every time…