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तलाश

  What we are seeking so frantically elsewhere may turn out to be the horse we have been riding all along. Harvey Cox हम जिस चीज़ की तलाश कहीं और कर रहे होते हैं वह हो सकता है कि हमारे पास ही हो। हारवी कॉक्स

Starting point of all achievement

  The starting point of all achievement is DESIRE. -Napoleon Hill   "The starting point of all achievement is DESIRE. Keep this constantly in mind. Weak desire brings weak results, just as a small fire makes a small amount of heat."   सभी उपलब्धि का प्रारंभिक बिंदु इच्छा है। इसे लगातार ध्यान में रखें। कमजोर इच्छा कमजोर परिणाम लाती है, जैसे एक छोटी सी आग थोड़ी मात्रा में गर्मी बनाती है। ― Napoleon Hill , Think and Grow Rich    

प्रेरक प्रसंग

  प्रेरक प्रसंग   ईर्ष्यी घृणी न संतुष्टः क्रोधनो नित्याशङ्कितः।परभाग्योपजीवी च षडेते नित्यदुः खिताः।। ईर्ष्या करने वाला , घृणा करने वाला , असंतोषी , क्रोधी , सदा संकित रहने वाला और दूसरों के भाग्य पर जीवन-निर्वाह करने वाला – ये छः सदा दुखी रहते हैं। अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्तिप्रज्ञा च कौल्यं च दमः श्रुतं च।पराक्रमश्चाबहुभाषिता चदानं यथाशक्ति कृतज्ञता च।। बुद्धि, कुलीनता, इन्द्रियनिग्रह, शास्त्रज्ञान, पराक्रम, अधिक न बोलना, शक्ति के अनुसार दान और कृतज्ञता – ये आठ गन पुरुष की ख्याति बढ़ा देते हैं। प्राप्यापदं न व्यथते कदाचि-दुद्योगमन्विच्छति चाप्रमत्तः। दुःखं च काले सहते महात्मा धुरन्धरस्तस्य जिताः सप्तनाः।।  जो धुरंधर महापुरुष आपत्ति पड़ने पर कभी दुखी नहीं होता, बल्कि सावधानी के साथ उद्योग का आश्रय लेता है तथा समयपर दुःख सहता है, उसके शत्रु तो पराजित ही हैं। यो नोद्धतं कुरुते जातु वेषंन पौरुषेणापि विकत्थतेन्यान।न मूर्छित: कटुकान्याह किञ्चित्प्रियं सदा तं कुरुते जानो हि।। जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता , क्रोध से व्याकुल होने पर भी

श्लोक

तरुवर फल नहि खात है, नदी न संचय नीर । परमारथ के कारनै, साधुन धरा शरीर ।। विद्या ददाति विनयम, विनयात्यात पात्रताम । पात्रतात धनम आप्नोति, धनात धर्मः, ततः सुखम ।।   बलवानप्यशक्तोऽसौ धनवानपि निर्धनः | श्रुतवानपि मूर्खोऽसौ यो धर्मविमुखो जनः ||   जो व्यक्ति धर्म ( कर्तव्य ) से विमुख होता है वह ( व्यक्ति ) बलवान् हो कर भी असमर्थ , धनवान् हो कर भी निर्धन तथा ज्ञानी हो कर भी मूर्ख होता है | जाड्यं धियो हरति सिंचति वाचि सत्यं , मानोन्नतिं दिशति पापमपाकरोति | चेतः प्रसादयति दिक्षु तनोति कीर्तिं , सत्संगतिः कथय किं न करोति पुंसाम् || अच्छे मित्रों का साथ बुद्धि की जड़ता को हर लेता है ,वाणी में सत्य का संचार करता है, मान और उन्नति को बढ़ाता है और पाप से मुक्त करता है | चित्त को प्रसन्न करता है और ( हमारी )कीर्ति को सभी दिशाओं में फैलाता है |(आप ही ) कहें कि सत्संगतिः मनुष्यों का कौन सा भला नहीं करती |    

Who has never made a mistake

------------------------------ ------------------------------ ------------------------------ ------------ "Anyone who has never made a mistake has never tried anything new" "Imagination is more important than knowledge"                                      ------- Einstein ------------------------------ ------------------------------ ------------------------------ --------- "जिसने कभी गलती नहीं की उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की | कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है|"  ------- आइंस्टाइन ज्ञान शक्ति है, लेकिन इसके विपरीत सत्य नहीं है।

अपनी कमजोरी में अपना बल छुपा है

बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था_. *इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था* _उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था ,और दूसरा एक दम सही था . इस वजह से रोज़ घर पहुँचते -पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था .ऐसा दो सालों से चल रहा था_. *सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है , वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है*. _फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया उसने किसान से कहा ,“ मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ ?”_ _“क्यों ? “ किसान ने पूछा , “ तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?”__ *“शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ , और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुंचा पाया ह

अहिंसा की शक्ति

निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी।