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सफलता का रहस्य

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सफलता का रहस्य

Saartatwa सारतत्व

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सारतत्व

साहस

श्रावस्ती क्षेत्र में उस वर्ष भयानक दुर्भिक्ष पड़ा। अन्न के अभाव से असंख्यों को प्राण त्यागना पड़ा। आजीविका की खोज में अगणित लोग देश त्यागकर अन्यत्र चले गये।
प्रश्न उन माताओं का था जिनके बच्चे छोटे थे और घर के पुरुष या तो मर गये थे या अन्यत्र जा चुके थे। वे दयनीय स्थिति में मरण मुख में जा रही थीं।
बुद्ध से यह करुण दृश्य देखा न गया। उस क्षेत्र के साधन सम्पन्नों की उनने गोष्ठी बुलाई और इस अनाथ समुदाय की प्राण रक्षा का उपाय करने के लिए अनुरोध किया।
श्रीमन्तों के पास साधन तो थे पर थे इतने ही कि अपने परिवार का एक वर्ष तक निर्वाह कर सकें। उनमें से किसी ने भी व्यवस्था जुटाने की पहल करने का साहस न दिखाया। सभी सिर झुकाये बैठे थे।
स्तब्धता को चीरते हुए एक बारह वर्ष की कन्या उठी। उसने कहा- देव, आज्ञा दें तो मैं इस समुदाय के निर्वाह का उत्तरदायित्व उठाऊँ।
तथागत ने चकित होकर पूछा- वत्स तुम कौन हो? और किस प्रकार यह व्यवस्था कर सकोगी?
बालिका ने कहा- देव! मनुष्य कितना ही निष्ठुर क्यों न हो, उसके अन्तराल में कहीं न कहीं करुणा अवश्य छिपी रहती है। मैं उसी को जिनके घर चूल्हा जलेगा उन्हीं से आध…

अनमोल जमा-पूँजी

बहुत समय पहले की बात है एक विख्यात ऋषि
गुरुकुल में बालकों को शिक्षा प्रदान किया करते थे
. उनके गुरुकुल में बड़े-बड़े राजा महाराजाओं के
पुत्रों से लेकर साधारण परिवार के लड़के भी पढ़ा
करते थे।
वर्षों से शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों की शिक्षा
आज पूर्ण हो रही थी और सभी बड़े उत्साह के
साथ अपने अपने घरों को लौटने की तैयारी कर रहे
थे कि तभी ऋषिवर की तेज आवाज सभी के कानो में
पड़ी ,
” आप सभी मैदान में एकत्रित हो जाएं। “
आदेश सुनते ही शिष्यों ने ऐसा ही किया।
ऋषिवर बोले , “ प्रिय शिष्यों , आज इस गुरुकुल में
आपका अंतिम दिन है . मैं चाहता हूँ कि यहाँ से
प्रस्थान करने से पहले आप सभी एक दौड़ में
हिस्सा लें .
यह एक बाधा दौड़ होगी और इसमें आपको कहीं
कूदना तो कहीं पानी में दौड़ना होगा और इसके
आखिरी हिस्से में आपको एक अँधेरी सुरंग से भी
गुजरना पड़ेगा .”
तो क्या आप सब तैयार हैं ?”
” हाँ , हम तैयार हैं ”, शिष्य एक स्वर में बोले .
दौड़ शुरू हुई .
सभी तेजी से भागने लगे . वे तमाम बाधाओं को पार
करते हुए अंत में सुरंग के पास पहुंचे . वहाँ बहुत
अँधेरा था और उसमे जगह – जगह नुकीले पत्थर
भी पड़े थे जिनके चुभने पर असहनीय पीड़ा का

शक्ति से बुद्धि ज्यादा बलवान होती है

एक पीपल के वृक्ष पर कौआ और उसकी पत्नि रहते थे । दोनों पति पत्नि में बहुत प्यार था ,दोनों कभी एक पल के लिए भी एक दुसरे से अलग नही होते थे । सुबह होते ही दोनों खाने की तलाश में निकल जाते और शाम होने पर घर लौटते ।बहुत ही आनन्द पूर्वक दोनों अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे ।किन्तु उन्हें एस बात का दुख था कि उनके घर कोई संतान नही थी ।कुछ समय बाद एक दिन उसकी पत्नि गर्भवती हो गई, यह सुनकर कौआ खुशी से झुमने लगा, कुछ ही समय में उनके घर दो प्यारे बच्चे आ गए, दोनों खुशी के मारे नाचने लगे, और आनन्द के साथ अपने बच्चो का पालन-पोषण करने लगे, एक दिन भोजन का प्रबंध कर जब शाम को घर लौटें तो उनके होश उड़ गए, क्योंकि दोनों बच्चे गायब थे, तब दोनों ने अपने आस-पास खुब ढुँढा, और फिर थक हार कर बैठ गए, उसी पेड़ पर एक बहुत बड़ा जहरीला साँप रहता था, कौआ समझ गया, कि बच्चों को इसी साँप ने खाया है , वह उसको अपना शत्रु समझ्ने लगा । कुछ समय के पश्चात उसकी पत्नि फिर से गर्भवती हुई ,उसने अंडे दिए,कौआ बोला- प्रिये, तुम इनकी रक्षा करो, मै अकेले ही भोजन का प्रबंध करके आता हुँ ।पत्नि वही रहकर अपने अंडों की रक्षा क…